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Bsc nursing first semester psychology|unit-2|Biological basis of Behaviour

Summary

यह वीडियो व्यवहार के जैविक आधार (Biological Basis of Behavior) की व्याख्या करता है। इसमें बताया गया है कि व्यवहार शारीरिक और मानसिक प्रक्रियाओं का परिणाम है। वीडियो में मन और शरीर के अंतर्संबंधों पर चर्चा की गई है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे शारीरिक दर्द एकाग्रता को प्रभावित करता है और मानसिक तनाव शारीरिक रोगों जैसे उच्च रक्तचाप या जीआई विकारों को जन्म दे सकता है। इसके अलावा, व्यक्तित्व विकास में आनुवंशिकता (Heredity) और पर्यावरण (अंतर्गर्भाशयी, कोशिकीय और बाहरी) की भूमिका और उनके बीच के अविभाज्य संबंध को विस्तार से समझाया गया है।

Key Insights

व्यवहार के तीन मुख्य घटक: संज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक गतिविधियाँ।

किसी भी व्यक्ति का व्यवहार तीन प्रकार की गतिविधियों का मिश्रण होता है: संज्ञानात्मक (Cognitive) जिसमें सोच, विचार और विश्लेषण शामिल है; भावात्मक (Affective) जो हमारे संवेगों और भावनाओं से संबंधित है; और क्रियात्मक (Conative/Motor) जो हमारी शारीरिक गतिविधियों और अंगों के कार्यों को दर्शाता है।

शरीर और मन का व्यवहार पर द्विदिश प्रभाव (Bidirectional Influence)।

शरीर और मन एक-दूसरे को गहराई से प्रभावित करते हैं। शारीरिक स्थिति, जैसे गंभीर दर्द या बीमारी, मानसिक स्थिति (तनाव, एकाग्रता की कमी) को प्रभावित करती है। इसी तरह, मानसिक अवस्थाएँ जैसे अत्यधिक क्रोध या चिंता, शारीरिक समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप (Hypertension) या पाचन संबंधी जटिलताओं (GI Distress) का कारण बन सकती हैं।

आनुवंशिकता (Heredity) व्यवहार और व्यक्तित्व के लिए खाका (Blueprint) प्रदान करती है।

हम अपने माता-पिता से शारीरिक संरचना, बुद्धि और प्रतिभा जैसे लक्षण विरासत में प्राप्त करते हैं। ये गुण हमारे आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करते हैं। यदि इन जीन में कोई उत्परिवर्तन (Mutation) होता है, तो यह रंग अंधापन (Color Blindness) या बौद्धिक अक्षमता जैसी समस्याओं के रूप में व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

पर्यावरण व्यक्तित्व के विकास और सीखने की प्रक्रिया को आकार देता है।

पर्यावरण में वे सभी बाहरी कारक शामिल हैं जो व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। इसमें सामाजिक विकास (समाज और परिवार से सीखना), बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक विकास शामिल है। जन्म के बाद बच्चा अपने परिवेश से भाषा, संचार कौशल और जीवन कौशल अपनाता है, जो उसके व्यवहार के पैटर्न को निर्धारित करते हैं।

Sections

व्यवहार का जैविक आधार और परिभाषा

व्यवहार शारीरिक और मानसिक प्रक्रियाओं का संगम है।

मानव व्यवहार केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के भौतिक कार्यों (तंत्रिका तंत्र, ग्रंथियां, मांसपेशियां) और मानसिक कार्यों (सोच, भावनाएं) का संयुक्त परिणाम है जो हमारी पर्सनालिटी को दर्शाता है।

व्यवहार के तीन पहलू: कोग्निटिव, अफेक्टिव और कोनेटिव।

वीडियो में व्यवहार को तीन गतिविधियों के मिश्रण के रूप में समझाया गया है: मोटर या शारीरिक कार्य (Conative), सोच और कल्पना जैसी मानसिक प्रक्रियाएं (Cognitive), और भावनाएं या संवेग (Affective)।

तंत्रिका तंत्र और इंद्रियों की भूमिका।

व्यवहार के पीछे संवेदी अंगों (Sense Organs) द्वारा उत्तेजनाओं (Stimulus) का अवलोकन करना, फिर मस्तिष्क द्वारा उसका विश्लेषण करना और अंत में एक प्रतिक्रिया देना शामिल है। इसमें मांसपेशियों और ग्रंथियों का भी योगदान होता है।


शरीर और मन का संबंध (Body-Mind Relationship)

शारीरिक स्थितियों का मानसिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव।

यदि शरीर में कोई समस्या है, जैसे बहुत तेज दर्द, तो यह एकाग्रता को कम कर देता है। पुरानी बीमारियां (Chronic Illness) व्यक्ति में चिंता और अवसाद पैदा कर सकती हैं। मस्तिष्क की चोट मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों तरह के कार्यों को बाधित करती है।

मानसिक स्थितियों का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव।

जब मन स्वस्थ नहीं होता, तो शरीर भी स्वस्थ महसूस नहीं करता। उदाहरण के लिए, लंबे समय तक तनाव और चिंता रहने से पाचन तंत्र में समस्या (GI Distress) हो सकती है और आगे चलकर पेप्टिक अल्सर जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

क्रोध और उच्च रक्तचाप का उदाहरण।

क्रोध एक मानसिक प्रक्रिया है, लेकिन यह शरीर में रक्तचाप (BP) को बढ़ा देता है। यदि कोई व्यक्ति हमेशा गुस्से में रहता है, तो उसे हाइपरटेंशन जैसी शारीरिक बीमारी होने का बड़ा जोखिम रहता है।

इमोशन: शरीर और मन का संयोजन।

संवेग या भावनाएं शारीरिक प्रतिक्रिया और मानसिक प्रक्रिया का योग हैं। जब डर लगता है, तो एड्रिनल रश होता है (शारीरिक), लेकिन लड़ना है या भागना (Fight or Flight), यह निर्णय दिमाग लेता है।


आनुवंशिकता और व्यवहार (Genetics and Behavior)

आनुवंशिकता (Heredity) का अर्थ और प्रभाव।

इसका तात्पर्य उन गुणों, क्षमताओं और प्रतिभाओं से है जो हमें अपने माता-पिता से विरासत में मिलते हैं। जैसे सचिन तेंदुलकर का बेटा क्रिकेट में रुचि रखता है, वैसे ही हम अपने पूर्वजों से कौशल और शारीरिक संरचना लेते हैं।

शारीरिक लक्षण और आत्मविश्वास का जुड़ाव।

शारीरिक बनावट, जैसे कद, व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है। अच्छी ऊंचाई वाले लोग अक्सर अधिक आत्मविश्वासी महसूस करते हैं, जबकि शारीरिक कमियां कभी-कभी व्यक्ति को समाज में दबने या असुरक्षित महसूस करने का कारण बन सकती हैं।

जीन उत्परिवर्तन और व्यवहार संबंधी असामान्यताएं।

निषेचन या जन्म के दौरान जीन में परिवर्तन (Mutation) से शारीरिक (जैसे कलर ब्लाइंडनेस) या मानसिक (जैसे मेंटल रिटार्डेशन) समस्याएं हो सकती हैं। इनका सीधा प्रभाव व्यक्ति के सीखने की क्षमता और व्यवहार पर पड़ता है।


पर्यावरण के प्रकार और व्यवहार पर प्रभाव

पर्यावरण में अंतःक्रिया के माध्यम से विकास।

पर्यावरण वह सब कुछ है जो बच्चे के जन्म के बाद उसे प्रभावित करता है (जीन को छोड़कर)। इसमें भाषा सीखना, संचार कौशल और सामाजिक व्यवहार का विकास प्रमुख रूप से शामिल है।

अंतर्गर्भाशयी वातावरण (Intrauterine Environment)।

यह गर्भ के अंदर का वातावरण है। यदि मां को पोषण की कमी (Anemia) है, तो बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास रुक सकता है, जिससे जन्म के समय बच्चा कमजोर या मंदबुद्धि हो सकता है।

कोशिकीय और बाहरी वातावरण।

कोशिकीय वातावरण (Intracellular) भ्रूण के विकास से जुड़ा है जहाँ गड़बड़ी होने पर जन्मजात विकृतियाँ हो सकती हैं। बाहरी वातावरण (External) में भौतिक (तापमान), जैविक (बीमारियाँ) और मनो-सामाजिक (परिवार की देखभाल या आघात) कारक शामिल हैं।


आनुवंशिकता और पर्यावरण का अंतर्संबंध

दोनों कारक विकास के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

व्यवहार के विकास में आनुवंशिकता और पर्यावरण को अलग नहीं किया जा सकता (Inseparable)। आनुवंशिकता हमें किसी कार्य के लिए क्षमता देती है, जबकि पर्यावरण उस क्षमता को निखारने का अवसर देता है।

आईक्यू (IQ) और सीखने की प्रक्रिया का उदाहरण।

यदि किसी व्यक्ति का आईक्यू विरासत में अच्छा मिला है, तो वह पर्यावरण में उपलब्ध संसाधनों से जल्दी सीखेगा। लेकिन यदि बौद्धिक स्तर कम है, तो उत्कृष्ट वातावरण में भी वह सीखने और अनुकूलन करने में कठिनाई महसूस करेगा।

कौशल विकास में सहयोग।

विरासत में मिले गुण (Traits) क्षमताओं को विकसित करने में मदद करते हैं। यदि किसी के पास गायन का हुनर है, तो समाज, परिवार और टैलेंट मिलकर उसे एक सफल गायक बनाने में मदद करेंगे।


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