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LEADERSHIP & THEORIES | Organisational Psychology| Psychology Entrances| Mind Review

Summary

यह वीडियो संगठनात्मक मनोविज्ञान (Organizational Psychology) के अंतर्गत नेतृत्व (Leadership) के विभिन्न सिद्धांतों और शैलियों का विस्तृत विवरण प्रदान करता है। इसमें लेविन, लिप्पिट और व्हाइट द्वारा दी गई तीन प्रमुख नेतृत्व शैलियों (ऑटोक्रेटिक, डेमोक्रेटिक और लेसे-फेयर), ओहायो स्टेट स्टडीज के दो आयामों (इनिशिएटिंग स्ट्रक्चर और कंसीडरेशन), और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की रिसर्च का विश्लेषण किया गया है। वीडियो इस बात पर जोर देता है कि कैसे एक लीडर का व्यवहार कर्मचारियों की संतुष्टि, उत्पादकता, और संगठन में अनुपस्थिति (Absenteeism) एवं टर्नओवर को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

Key Insights

लेविन, लिप्पिट और व्हाइट की नेतृत्व शैलियों का वर्गीकरण

वीडियो में तीन मुख्य नेतृत्व शैलियों को परिभाषित किया गया है: ऑटोक्रेटिक (जहाँ लीडर का पूर्ण नियंत्रण होता है), डेमोक्रेटिक (जहाँ निर्णय लेने में समूह की भागीदारी होती है), और लेसे-फेयर (जहाँ लीडर न्यूनतम हस्तक्षेप करता है और पूरी शक्ति सदस्यों को सौंप देता है)।

ओहायो स्टेट स्टडीज: इनिशिएटिंग स्ट्रक्चर बनाम कंसीडरेशन

यह अध्ययन नेतृत्व के दो स्वतंत्र आयामों की पहचान करता है। 'इनिशिएटिंग स्ट्रक्चर' लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भूमिकाओं को परिभाषित करने पर केंद्रित है, जबकि 'कंसीडरेशन' आपसी विश्वास, कर्मचारियों के विचारों के सम्मान और मानवीय संबंधों पर केंद्रित है। उच्चतम कार्य परिणाम तब प्राप्त होते हैं जब दोनों आयाम उच्च होते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की स्टडी: जॉब-सेंटर्ड बनाम एम्प्लॉई-सेंटर्ड लीडरशिप

मिशिगन रिसर्च बताती है कि जॉब-सेंटर्ड लीडरशिप केवल उत्पादन और प्रदर्शन पर ध्यान देती है, जो दीर्घकाल में उच्च टर्नओवर का कारण बनती है। इसके विपरीत, एम्प्लॉई-सेंटर्ड लीडरशिप कर्मचारियों की जरूरतों और संतुष्टि पर ध्यान देती है, जिससे संगठन में टर्नओवर और अनुपस्थिति कम होती है।

Sections

लेविन, लिप्पिट और व्हाइट की नेतृत्व शैलियाँ

ऑटोक्रेटिक (Autocratic) नेतृत्व में लीडर का पूर्ण नियंत्रण और अथॉरिटी होती है।

इस शैली में लीडर स्वयं ही सभी नीतियां और प्रक्रियाएं निर्धारित करता है। वह टीम के सदस्यों के इनपुट या राय की परवाह नहीं करता है। काम कैसे करना है, इसका निर्देश केवल मैनेजर द्वारा दिया जाता है और संचार एकतरफा होता है।

डेमोक्रेटिक (Democratic) नेतृत्व में समूह की सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

डेमोक्रेटिक शैली में लीडर निर्णय प्रक्रिया में टीम के सदस्यों को शामिल करता है। हालांकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार लीडर के पास होता है, लेकिन योजना बनाने और कार्यों को लागू करने में सभी का योगदान लिया जाता है, जिससे टीम का मनोबल बढ़ता है।

लेसे-फेयर (Laissez-faire) नेतृत्व में लीडर की भूमिका बहुत ही सीमित और निष्क्रिय होती है।

यहाँ लीडर अपनी सारी शक्तियाँ समूह के सदस्यों को सौंप देता है। वह केवल आवश्यक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराता है, लेकिन निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता सदस्यों के पास होती है। लीडर इसमें नाममात्र का हस्तक्षेप करता है।


ओहायो स्टेट स्टडीज (Ohio State Studies)

इनिशिएटिंग स्ट्रक्चर आयाम लक्ष्यों को प्राप्त करने और भूमिकाओं को परिभाषित करने पर केंद्रित है।

इसमें लीडर अपने और अपने अधीनस्थों की भूमिका को बहुत स्पष्ट रूप से डिजाइन करता है। वह कार्य के उद्देश्यों को समझाने और कार्यों को कैसे निष्पादित करना है, इस पर जोर देता है ताकि लक्ष्यों तक प्रभावी ढंग से पहुँचा जा सके।

कंसीडरेशन आयाम आपसी विश्वास और कर्मचारियों की भावनाओं के सम्मान से संबंधित है।

यह आयाम लीडर के मानवीय पक्ष को दर्शाता है। एक 'कंसीडरेट' लीडर अपने सपोर्ट्स के विचारों और भावनाओं का सम्मान करता है, उनके साथ अच्छे और सहायक पेशेवर संबंध बनाता है और उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील होता है।

अध्ययन के अनुसार, उच्च इनिशिएटिंग स्ट्रक्चर और उच्च कंसीडरेशन का संयोजन सबसे प्रभावी होता है।

ओहायो स्टेट के शोधकर्ताओं ने पाया कि जब कोई लीडर अपने कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करने के साथ-साथ भूमिकाओं को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है, तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। हालांकि, कंसीडरेशन कम होने पर कर्मचारी असंतुष्ट हो सकते हैं।

नेतृत्व व्यवहार को मापने के लिए दो महत्वपूर्ण प्रश्नावली (Questionnaires) विकसित की गई थीं।

पहली प्रश्नावली LBDQ (Leader Behavior Description Questionnaire) है जो लीडर के प्रति अधीनस्थों की धारणा को मापती है। दूसरी SBDQ (Supervisory Behavior Description Questionnaire) है, जिसका उपयोग लीडर स्वयं के व्यवहार को मापने के लिए करते हैं।


यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन स्टडीज (University of Michigan Studies)

जॉब-सेंटर्ड लीडरशिप का मुख्य केंद्र कार्य के तकनीकी पहलुओं और उत्पादन विधियों पर होता है।

इस शैली के नेता अधीनस्थों के काम पर कड़ी निगरानी रखते हैं और केवल उत्पादन और प्रक्रियाओं पर ध्यान देते हैं। हालांकि इससे शुरुआत में उत्पादन बढ़ सकता है, लेकिन यह कर्मचारियों के बीच तनाव पैदा करता है।

एम्प्लॉई-सेंटर्ड लीडरशिप कर्मचारियों की संतुष्टि और उनके अंतर्वैयक्तिक संबंधों को प्राथमिकता देती है।

यहाँ लीडर अपने ग्रुप के सदस्यों की कुशलता और उनके विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। यह शैली सदस्यों की स्वायत्तता का समर्थन करती है और उनके मनोबल को ऊँचा रखने का प्रयास करती है।

जॉब-सेंटर्ड लीडरशिप के कारण कर्मचारियों में अनुपस्थिति और टर्नओवर की समस्या बढ़ने की संभावना होती है।

जब प्रबंधन केवल उत्पादन पर केंद्रित होकर कर्मचारियों की भावनाओं की उपेक्षा करता है, तो काम का माहौल टॉक्सिक हो जाता है। इससे कर्मचारी ज्यादा छुट्टियां लेते हैं (Absenteeism) या नौकरी छोड़कर चले जाते हैं (Turnover)।

एम्प्लॉई-सेंटर्ड व्यवहार संगठन की स्थिरता और कर्मचारी संतुष्टि के लिए अधिक लाभकारी साबित होता है।

शोध में पाया गया कि जो लीडर कर्मचारियों की जरूरतों पर ध्यान देते हैं, उनके संगठन में लोग अधिक वफादार होते हैं, जिसका अंततः सकारात्मक प्रभाव उत्पादन और संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति पर पड़ता है।


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